Friday, September 19, 2014

भोर से ढलती शाम तक…

मेरे गाँव झाकर,(निवाली) जिसे निमाड़ का शिमला भी कहा जाता है, में गर्मियों के एक दिन सुबह से शाम तक के रंग मेरी नजरों से आप भी देखिए ...

अलसुबह खामोशी का मंजर 

बस रोशनी आने को है 

ताजा महुआ 

अब लो शाम ढलने को है 

बादलों की ओट में 

दुनिया भी ठिठक गयी 

बादलों का एक रूप ये भी 

अलविदा … 

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