Tuesday, January 16, 2024

London Diary- रंगों की दुनिया

Vincent van Gogh- The Immercive Experience-

लंदन के तीसरे दिन का अंतिम पड़ाव था मेरी कलाकार बिटिया के पसंदीदा कलाकार  Vincent van Gogh की पेंटिंग्स पर आधारित प्रदर्शनी में जाना.


Van gogh उन्नीसवीं सदी के एक ऐसे कलाकार थे, जिनकी पेंटिंग्स पश्चिमी कला जगत में काफ़ी महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं. लेकिन दुःखद यह कि ये पहचान उन्हें उनके जीवन काल में नहीं मिल पाई.

वो बचपन से गंभीर और सबसे अलग थे, उन्हें ड्राइंग पसंद थी. युवा होने के बाद उन्होंने कई पेशे अपनाये लेकिन कहीं संतुष्ट नहीं हो पाए. उनके भाई ने उन्हें उनके पसंदीदा काम के प्रति प्रेरित किया और उनकी हर तरह से मदद की. इसके बाद उन्होंने इस कला को डूब कर जिया. 

उन्होंने प्रकृति को जिस तरह से कैनवास पर उतारा है वो बेहद खूबसूरत है, sunflower series , किसान, खेतीहर मजदूर , स्वयं के पोट्रेट, स्थिर चित्र और Stary night उनकी प्रसिद्ध कृतियों में से है.  इस प्रदर्शनी से देखिये उनकी Sunflower series की एक झलक


डच मूल के विनसेंट कई देशों में रहे और वहां के जीवन को उनकी कृतियों में देखा जा सकता है. Bold colour और अलग से स्ट्रोक्स उनकी पहचान हैं. कहा जाता है कि वे  colour blind थे, इस वजह से भी उनकी पेंटिंग्स में रंग bold और अलग तरह से दिखते हैं. उन्होंने लगभग 2000 पेंटिंग्स बनाई और इनमें से ज्यादातर उनके अंतिम 2 वर्षो की हैं.  प्रकृति जैसी दिखती है उस से वैसा ना बनाते हुए  अपने ही भावों के अनुरूप चित्रण करना  उनकी खासियत रही है. उन्होंने इसके बारे में कहा भी है...


"Instead of trying to reproduce exactly what I see before me, I make more arbitrary use of color to express myself more forcefully."

 वे लम्बे समय अपनी मानसिक बीमारियों से ग्रसित रहे. इलाज के दौरान एक asylum में उन्होंने कई पेंटिंग्स बनाई  उन्होंने 37 वर्ष की अल्पायु में आत्महत्या कर ली और इस दुनिया को अलविदा कह दिया. सच में कलाकार इस दुनिया से अलग होते हैं, उन्हें कौन समझें और कौन साथ दे....

उनके जीवनकाल में उनकी केवल एक पेंटिंग बिकी थी और अब उनकी कृतियाँ कला जगत में सबसे मूल्यवान की श्रेणी में आती हैं. Stary nights तो विश्व की सबसे मशहूर कलकृतियों में शामिल है और इसका प्रदर्शन अलग अलग शहरों में होता रहता है. देखिये stary night  का खूबसूरत वीडियो के रूप में चित्रण प्रदर्शनी की अंतिम गैलरी से और डूब जाइये रंगों के इस अनुपम संसार में...


Van Gogh की पेंटिंग्स का बड़ा संग्रह पैरिस और एमस्टरडम के म्यूजियम में है. इनकी पेंटिंग्स पर आधारित शो अलग अलग शहरों में होते रहते हैं. संभवतः भोपाल में भी अप्रैल माह में यह होगा.

मेरी बेटी के कमरे में इसकी प्रतिकृति है और उसके फोन के बैक कवर पर उसने खुद इसे बनाकर लगाया है. यहाँ आना उसकी  लिस्ट में प्राथमिकता से शामिल था और उसकी वजह से मैं भी इस महान कलाकार के बारे में विस्तार से जान पाई.

अंत में बिटिया की बनाई हुई तस्वीर अपने मूल कलाकार की तस्वीर की पृष्ठभूमि के साथ...



Sunday, January 14, 2024

London Diary - लंदन ठुमकदा

 लंदन पंहुचने के बाद पहली बार सुबह धूप दिखी थी और हम 'जादू' ( जी हाँ वही कोई मिल गया वाला ) की तरह धूप देखकर खुश हो गए थे.


 (Westminster abbey के बाहर का नजारा 👇🏻



पर जब हम Westminster Abbey में थे तब तक फिर बरखा रानी झूम कर बरसी और एबे से निकलते ही हमें थोड़ा भिगाया और अपने छातों में हम पंहुचे Westminster Palace यानि इंग्लैंड की संसद. संसद में अंदर विजिट के बाद मेरे प्यारे दोस्त ( अगर आपने मेरा इंस्टाग्राम अकाउंट देखा है तो आप जानते हैं कि बादल मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं ) बादलों ने हमारे बाहर निकलने पर हम हिंदुस्तानी जादुओं के सम्मान  मे वापस धूप को भेज दिया 😃😃😃

 तो बरखा की इस आँख मिचौली के बाद जैसे ही बाहर निकले, हमें मिली बड़ी बहन, हाहाहाहा... Big Ben. अब आपको फिर याद दिलाऊं अपने हिंदुस्तानी स्टाइल में तो मेरा आज का टाइटल देखिये... तू घंटी बिग बेन दी पूरा लंदन ठुमकदा ❤️❤️❤️, इस गाने वाली बिग बेन....तो मैं भी थोड़ी सी, हाँ थोड़ी सी ठुमक ली ☺️☺️




एक छोटा सा वीडियो बिग बेन का जैसे उसे मैंने पहली बार देखा.  जिसे अब क्वीन एलिज़ाबेथ की याद में एलिज़ाबेथ टॉवर के नाम से जानते हैं.



Westminster palace जैसा कि नाम ही पैलेस था, उसके अनुरूप आलीशान था. गज़ब की वास्तुकला थी भीतर, लेकिन फोटोग्राफी केवल दरवाजे तक ही कर सकते थे बाकी के लिए आपको खुद जाना होगा.  रही बात इतिहास की तो वो जानना दिलचस्प था कि कैसे राजशाही के साथ संसदीय लोकतंत्र ने जन्म लिया. खूबसूरत सेंट्रल हॉल जिसके एक तरफ House of Lord's और एक तरफ house of Commons था. नाम के अनुरूप दोनों का इंटीरियर भी उच्च सदन आलीशान और कॉमन वाला साधारण... लेकिन सत्ता की बात करें तो असली सत्ता आम आदमी वाले सदन में ही है.


ये है  Westminster palace का पहला ऐतिहासिक हॉल जो 11वीं सदी में बना. उस समय यह इंग्लैंड का सबसे बड़ा हॉल था जो समय समय पर सत्ता के अनुसार अलग अलग उपयोग में आता रहा, आजकल राजपरिवार या देश कोई महत्वपूर्ण के व्यक्ति के निधन के बाद अंतिम सम्मान हेतु यहाँ रखा जाता है.
और इसके बाद ये है इंग्लैंड की संसद का प्रवेश द्वार...





थैंम्स नदी के किनारे स्थित इस पैलेस की खूबसूरती देखते ही बनती है.  1840 से 1876 के बीच पुनरनिर्मित इस भवन का एरिया 112476 वर्ग मीटर है.


Westminster palace ( glasswork )

मेरे लिए ये जानना दिलचस्प था कि इंग्लैंड कैसे 1686 से 1888 के दौरान राजशाही से लोकतंत्र में परिवर्तित हुआ.  लेकिन महिलाओं को अपने वोट देने के अधिकार के लिए 90 साल का लम्बा संघर्ष करना पड़ा और उन्हें 1921 में यह अधिकार मिला.

इनके संसदीय इतिहास को जानने के दौरान यहीं लगता रहा कि ये कौनसी मानसिकता थी कि दूसरे देशों को अपने पराधीन रखो और वहां के संसाधनों को लूट कर खुद को संपन्न करो, ये कैसा लोकतंत्र और क्या इसकी ऐतिहासिकता...

दिन अभी बाकी है....

उम्मीद अभी बाकी है...

Wednesday, January 10, 2024

लंदन डायरी - Westminster Abbey

 आज का दिन था इंग्लैंड की राजशाही औऱ संसदीय इतिहास के नाम...

सुबह के सूरज के साथ यूँ रोशन होते हुए हमें इस आलीशान इतिहास की पहली झलक मिली (  वैसे लंदन की unpredictable बारिश को देखते हुए सूरज के दर्शन होना किसी तोहफ़े से कम नहीं 😊)


ये यात्रा शुरू हुई Westminster Abbey से. ये ना केवल धर्मस्थल है बल्कि 1066 से इंग्लैंड के राजा की ताजपोशी का स्थान भी.  यह राजपरिवार का ऐसा चर्च है जहाँ इंग्लैंड के राजपरिवार के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम होते आये हैं. फिर चाहे वो ताजपोशी हो, विवाह हो या दफनाना.


एक ओर महत्वपूर्ण तथ्य यह देश के लिए इतना महत्वपूर्ण स्थान है कि यहाँ ना केवल राजपरिवार के बल्कि UK के विशिष्ट व्यक्तियों को भी दफनाया गया है. ये शख्सियतें हैं सर अइजेक न्यूटन, चार्ल्स डार्विन,स्टीफन हौकीन्स, रुड्यार्ड किपलिंग, चार्ल्स डिकीन्स जैसे कई और भी,

अंतिम खास बात यहाँ राजाओं के बीच में पूरे सम्मान के साथ एक अनजान सैनिक को भी दफनाया गया है जो प्रतीक है अपने उन अनजान सैनिकों को सम्मान देने का जो शहीद हुए और अंतिम समय अपनों के बीच नहीं पहुंच पाए. आप बाकी सब कब्रों के ऊपर से गुजर सकते हैं लेकिन इस अनजान सैनिक की क़ब्र पर से नहीं . यह जानना अनूठा तो था लेकिन अपनी संस्कृति के कारण धर्मस्थल पर दफनाया जाना थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ.


स्थापत्य कला की बात करें तो गोथिक वास्तुकला का सुन्दर उदाहरण है ये स्थान, 10वीं सदी से इसका निर्माण शुरू हुआ ओर कई सौ साल चलता रहा लेकिन अलग अलग राजाओं ने इसकी  वास्तु शैली को समान बनाये रखा. इसका खूबसूरती और कहानियां आपको बांध कर रख लेती हैं. अब तस्वीरों के साथ इसके सफर पर चलिए...





ये चर्च के सबसे भीतरी हिस्से की छत की तस्वीर है, कितना शानदार और आलिशान शिल्प है. अगली तस्वीर से और स्पष्ट दिखेगा








संसद अगले भाग में...






Monday, January 8, 2024

लंदन डायरी -लंदन और लंदन के लोग

लंदन और लंदन के लोग....

कैसा है ये देस... सूरज भी आलस में है, देर से आता है और जल्दी भाग जाता है, यानि सुबह 8 बजे सूर्योदय और शाम 4 बजे सूर्यास्त. उस पर जुल्म ये कि आते ही सामना हुआ बारिश ने... 5 डिग्री तापमान और उस पर बारिश और रही सही कसर तेज हवाओं ने पूरी कर दी. इस इंडियन की तो... 😬😬😬😬 जी हाँ बारह ही बज गई.खैर पहली फुर्सत में अपने लिए यहाँ के मौसम के मुताबिक नये जूते, कोट और छाता लिया. तो हम हो गए तैयार ठण्ड से लड़ने के लिए, इसके बाद भी जद्दोजहद जारी है..यानि यहाँ आपको 3 लेयर में कपड़े पहनना जरुरी है, फिर भी कुड़ कुड़.. हाहाहा. इस सर्दी का अपना मजा है. रोज सुबह बाहर निकलते ही ठण्ड का सामना इन तीन लेयर्स के साथ मेरा हिंदुस्तानी गाना करता है 😍😍😍

एक और उलझन... शरीर तो उड़कर आ गया पर शायद प्राण जिसे कहते हैं उसे इस धरती पर आने में समय लगेगा. मैं अभी भी इंडिया के समय के हिसाब से जाग जाती हूं, चाहे कभी भी सोऊँ. . दूसरे दिन तो यहाँ के शाम के 6 बजे थे ( इंडिया के रात के 11:30) और नींद के झोंके आ रहे थे, ना ना करते मैं 7 बजे लुढ़क ही गई. रोज ही रात में 2 बजे नींद खुल रही है , क्योंकि मेरे देस में तो जागने का समय हो जता है. ना जाने कितने दिन लगेंगे इस मुई उलझन से निकलने में. अब पता चला कि jet lag क्या होता है 😃😃.

इस शहर में लोग बस चलते ही रहते हैं, यानि बहुत पैदल चलते हैं, थकते भी नहीं...और हाँ यहाँ के लोग बस सॉरी और थैंक्यू ही कहते रहते हैं, और एक बात और इतना ज्यादा सिगरेट पीते हैं कि उफ्फ्फ.

नई बात...सुपर बाजार में  में खुद सामान उठाओ, मशीन पर खुद बिलिंग करो और निकल आओ, कुछ रेस्टोरेंट में भी ऐसा ही था. ये बढ़िया लगा. और हाँ पिछले ब्लॉग में ट्रैन की एक बात छूट गई थी एस्कलेटर पे दाहिने हाथ पर खड़े होना होता है ताकि जिन्हे जल्दी है वो लेफ्ट से चलकर या भागकर निकल जाएँ.  इसका वीडियो यहाँ नहीं पोस्ट कर सकती आगे कभी लिंक शेयर करुँगी.

शहर में हर देश के लोग दिखते हैं.लगता है दुनिया भर के लोग यहाँ घूमने ही आये हैं.  पर ये शहर बड़ा महंगा है, कुछ भी खरीदते वक़्त मैं मन ही मन में रुपये में ही तुलना करती रहती 😃😃. इस अंतर के कारण भी बिटिया के लाख बुलाने पर भी लंदन आने के लिए मन राजी नहीं हो पा रहा था. अब जब आ गई हूं और घूम रही हूं तो लगता है कि अब भी नहीं आ पाती तो कब आती. आज बेटी से कहा कि तुम जरुर घूमती रहा करो, दुनिया देखो, हमारे जैसे जीवन की आपधापी में उलझ कर मत रह जाना. ये सभी युवाओं के लिए सन्देश है कि जब भी जैसा अवसर मिले निकलो. आजकल तो ट्रेवल हॉस्टल जैसे तमाम साधन हैं रुकने के, सोलो ही सही पर अपना bagpack लेकर निकल लो. दुनिया बहुत खूबसूरत है इसे देखो, इस घूमने में जीवन के कई रंगों से परिचय होगा जो आपके व्यक्तित्व को और चमकदार बनाएगा. 

अभी के लिए इतना ही...

Sunday, January 7, 2024

लंदन डायरी -ब्रिटिश म्यूजियम

 आज का दिन ब्रिटिश म्यूजियम के नाम था. दुनिया के 3 सबसे अच्छे म्यूजियम में से एक. 


 नये साल की छुट्टी का आखरी दिन होने से म्यूजियम के गेट के बाहर लाइन एक चौराहे तक पहुंच गई थी, लेकिन हर आने वाला व्यक्ति शांति से लाइन में पीछे आकर खड़ा हो रहा था. म्यूजियम का कोई स्टॉफ नहीं लाइन लगवाने वाला, उसे बनाये रखने की जद्दोजहद करने वाला. गज़ब का अनुशासन दिखा. 

270 साल पुराना ये म्यूजियम किसी समय के ब्रिटिश राज की तरह पूरी दुनिया की संस्कृतियों को समेटे हुए है. यहाँ बाकायदा उन देशों को समर्पित गैलरी हैं जिनमें मानव सभ्यता औऱ संस्कृति का विकास देखने को मिलता है. 75000 वर्ग मीटर में निर्मित, 90 से ज्यादा गैलरी,  80 लाख वस्तुएँ, जैसे पूरी दुनिया ही सिमट आई हो यहाँ.

सब कुछ एक दिन में देखना संभव भी नहीं था पर जितना देखा वो बड़ा अच्छा अनुभव था. कई चीजें बेहद खूबसूरत थीं, अफ्रीका की लकड़ी पर नक्काशी, कोरिया का सुन्दर सा घर, मिस्र की ममी , चीन के बेहद सुन्दर चीनी मिट्टी के बर्तन , रोमन साम्राज्य की भी ढेर सारी चीजें दिखीं,अमेरिका , यूरोप हर जगह की पुरानी औऱ संपन्न सभ्यतायें.

अफ्रीका की लकड़ी पर नक्काशी

मिस्र की ममी 
ये तस्वीर लंदन की एक कंपनी द्वारा निर्मित 1901 के एक कैश रजिस्टर की है. जिसमें विक्रय का हिसाब होने के साथ साथ कैश रखने की ड्रावर भी है.
हमारे देश की एक महत्वपूर्ण चीज भी यहाँ दिखी, टीपू सुल्तान की तलवार 👇🏻👇🏻

कहानी अमारावती की...
यहाँ आकर पता चला अपने देश के उस अमारावती के बारे में जिसे मैं जानती नहीं थी. उसके कुछ हिस्से में चेन्नई में हैं औऱ कुछ यहाँ.इसका इतिहास पढ़िए, दिलचस्प है 👇🏻



 एक चांदी की प्लेट में रामायण के दृश्य भी बेहद सुन्दर थे 👇🏻👇🏻



कुल जमा शानदार चीजें लेकिन यहाँ लाने के इतिहास में हम जैसे उस समय के पराधीन देशों के दुख शामिल है. फिर भी  विभिन्न संस्कृतियों के इतिहास को जैसे सहेज कर रखा है वो काबिले तारीफ है. तो लंदन यात्रा में जरुर visit कीजिये.
तस्वीरें और वीडियो काफ़ी हैं जिनकी लिंक अलग से यात्रा के बाद शेयर करुँगी.



Thursday, January 4, 2024

लंदन डायरी- पहला दिन

बिटिया लंदन एयरपोर्ट पर इंतजार में ख़डी थी औऱ उस से 8 महीने बाद मिलने की ख़ुशी में इमिग्रेशन की लाइन की लम्बी लाइन कोफ्त बढ़ा रही थी. 

अलग अलग देशों के ढेर सारे लोग..., सबके साथ कितनी कहानियाँ होंगी. 90 प्रतिशत लोग फोन में घुसे हुए, मानो दुनिया उनके आस पास नहीं फोन में ही है. 

असली दुनिया तब दिखी जब मेरी तरह कई लोग किसी इंतजार करते अपने से गले लग कर भावुक हो रहे थे.

तो लंदन आते ही परिचय हुआ लंदन की जीवन रेखा लंदन ट्यूब से. धरती के नीचे एक अलग ही दुनिया, लगभग 80 फ़ीट नीचे इतना निर्माण, लगा फिर ऊपर इतनी बड़ी बड़ी इमरातों किस नींव पर टिकी हैं  🤔 बड़ा सा सूटकेस लेकर ट्रैन में जाना मुझे अजीब लग रहा था पर पता चला कि यह सामान्य बात है, यहाँ से टैक्सी कई गुना ज्यादा समय लेगी औऱ ये इतना असामान्य नहीं है जितना मैं सोच रही. 1863 में शुरू हुई 160 साल पुरानी इस ट्यूब सेवा में 272 स्टेशन हैं औऱ 11 लाइन्स है. इसमें लगभग 50 लाख लोग रोज सफर करते हैं. टिकट नहीं लेना पड़ता,  स्टेशन में घुसने से पहले औऱ निकलते वक़्त अपने bank कार्ड को स्वाइप करो वो टिकट का पैसा काट लेंगे, दिन में 12 से ज्यादा यात्रा का पैसा नहीं कटेगा, चाहे आप कितना ही घूमो. औऱ ये टिकट भी बेहद सस्ती अन्य निजी साधनों की तुलना में. हर 2/4 मिनट में स्टेशन आता है, एक मिनट में चढ़ना उतरना हो जता है, हर 2/4 मिनट में ट्रैन है तो किसी को चढ़ने की हड़बड़ी भी नहीं रहती. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ये तरीका मुझे बड़ा अच्छा लगा. 



इस यात्रा की तैयारी में बिटिया से मेरे रोल बदल गए  थे. तैयारी से लेकर यहाँ हर कदम पर  वो इस दुनिया के तौर तरीकों से मेरा परिचय करा रही थी, मैं एक अच्छी बच्ची की तरह सब सुन रही थी गुन रही थी.