आज का दिन ब्रिटिश म्यूजियम के नाम था. दुनिया के 3 सबसे अच्छे म्यूजियम में से एक.
नये साल की छुट्टी का आखरी दिन होने से म्यूजियम के गेट के बाहर लाइन एक चौराहे तक पहुंच गई थी, लेकिन हर आने वाला व्यक्ति शांति से लाइन में पीछे आकर खड़ा हो रहा था. म्यूजियम का कोई स्टॉफ नहीं लाइन लगवाने वाला, उसे बनाये रखने की जद्दोजहद करने वाला. गज़ब का अनुशासन दिखा.
270 साल पुराना ये म्यूजियम किसी समय के ब्रिटिश राज की तरह पूरी दुनिया की संस्कृतियों को समेटे हुए है. यहाँ बाकायदा उन देशों को समर्पित गैलरी हैं जिनमें मानव सभ्यता औऱ संस्कृति का विकास देखने को मिलता है. 75000 वर्ग मीटर में निर्मित, 90 से ज्यादा गैलरी, 80 लाख वस्तुएँ, जैसे पूरी दुनिया ही सिमट आई हो यहाँ.
सब कुछ एक दिन में देखना संभव भी नहीं था पर जितना देखा वो बड़ा अच्छा अनुभव था. कई चीजें बेहद खूबसूरत थीं, अफ्रीका की लकड़ी पर नक्काशी, कोरिया का सुन्दर सा घर, मिस्र की ममी , चीन के बेहद सुन्दर चीनी मिट्टी के बर्तन , रोमन साम्राज्य की भी ढेर सारी चीजें दिखीं,अमेरिका , यूरोप हर जगह की पुरानी औऱ संपन्न सभ्यतायें.







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