Thursday, January 4, 2024

लंदन डायरी- पहला दिन

बिटिया लंदन एयरपोर्ट पर इंतजार में ख़डी थी औऱ उस से 8 महीने बाद मिलने की ख़ुशी में इमिग्रेशन की लाइन की लम्बी लाइन कोफ्त बढ़ा रही थी. 

अलग अलग देशों के ढेर सारे लोग..., सबके साथ कितनी कहानियाँ होंगी. 90 प्रतिशत लोग फोन में घुसे हुए, मानो दुनिया उनके आस पास नहीं फोन में ही है. 

असली दुनिया तब दिखी जब मेरी तरह कई लोग किसी इंतजार करते अपने से गले लग कर भावुक हो रहे थे.

तो लंदन आते ही परिचय हुआ लंदन की जीवन रेखा लंदन ट्यूब से. धरती के नीचे एक अलग ही दुनिया, लगभग 80 फ़ीट नीचे इतना निर्माण, लगा फिर ऊपर इतनी बड़ी बड़ी इमरातों किस नींव पर टिकी हैं  🤔 बड़ा सा सूटकेस लेकर ट्रैन में जाना मुझे अजीब लग रहा था पर पता चला कि यह सामान्य बात है, यहाँ से टैक्सी कई गुना ज्यादा समय लेगी औऱ ये इतना असामान्य नहीं है जितना मैं सोच रही. 1863 में शुरू हुई 160 साल पुरानी इस ट्यूब सेवा में 272 स्टेशन हैं औऱ 11 लाइन्स है. इसमें लगभग 50 लाख लोग रोज सफर करते हैं. टिकट नहीं लेना पड़ता,  स्टेशन में घुसने से पहले औऱ निकलते वक़्त अपने bank कार्ड को स्वाइप करो वो टिकट का पैसा काट लेंगे, दिन में 12 से ज्यादा यात्रा का पैसा नहीं कटेगा, चाहे आप कितना ही घूमो. औऱ ये टिकट भी बेहद सस्ती अन्य निजी साधनों की तुलना में. हर 2/4 मिनट में स्टेशन आता है, एक मिनट में चढ़ना उतरना हो जता है, हर 2/4 मिनट में ट्रैन है तो किसी को चढ़ने की हड़बड़ी भी नहीं रहती. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ये तरीका मुझे बड़ा अच्छा लगा. 



इस यात्रा की तैयारी में बिटिया से मेरे रोल बदल गए  थे. तैयारी से लेकर यहाँ हर कदम पर  वो इस दुनिया के तौर तरीकों से मेरा परिचय करा रही थी, मैं एक अच्छी बच्ची की तरह सब सुन रही थी गुन रही थी. 

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