Monday, January 8, 2024

लंदन डायरी -लंदन और लंदन के लोग

लंदन और लंदन के लोग....

कैसा है ये देस... सूरज भी आलस में है, देर से आता है और जल्दी भाग जाता है, यानि सुबह 8 बजे सूर्योदय और शाम 4 बजे सूर्यास्त. उस पर जुल्म ये कि आते ही सामना हुआ बारिश ने... 5 डिग्री तापमान और उस पर बारिश और रही सही कसर तेज हवाओं ने पूरी कर दी. इस इंडियन की तो... 😬😬😬😬 जी हाँ बारह ही बज गई.खैर पहली फुर्सत में अपने लिए यहाँ के मौसम के मुताबिक नये जूते, कोट और छाता लिया. तो हम हो गए तैयार ठण्ड से लड़ने के लिए, इसके बाद भी जद्दोजहद जारी है..यानि यहाँ आपको 3 लेयर में कपड़े पहनना जरुरी है, फिर भी कुड़ कुड़.. हाहाहा. इस सर्दी का अपना मजा है. रोज सुबह बाहर निकलते ही ठण्ड का सामना इन तीन लेयर्स के साथ मेरा हिंदुस्तानी गाना करता है 😍😍😍

एक और उलझन... शरीर तो उड़कर आ गया पर शायद प्राण जिसे कहते हैं उसे इस धरती पर आने में समय लगेगा. मैं अभी भी इंडिया के समय के हिसाब से जाग जाती हूं, चाहे कभी भी सोऊँ. . दूसरे दिन तो यहाँ के शाम के 6 बजे थे ( इंडिया के रात के 11:30) और नींद के झोंके आ रहे थे, ना ना करते मैं 7 बजे लुढ़क ही गई. रोज ही रात में 2 बजे नींद खुल रही है , क्योंकि मेरे देस में तो जागने का समय हो जता है. ना जाने कितने दिन लगेंगे इस मुई उलझन से निकलने में. अब पता चला कि jet lag क्या होता है 😃😃.

इस शहर में लोग बस चलते ही रहते हैं, यानि बहुत पैदल चलते हैं, थकते भी नहीं...और हाँ यहाँ के लोग बस सॉरी और थैंक्यू ही कहते रहते हैं, और एक बात और इतना ज्यादा सिगरेट पीते हैं कि उफ्फ्फ.

नई बात...सुपर बाजार में  में खुद सामान उठाओ, मशीन पर खुद बिलिंग करो और निकल आओ, कुछ रेस्टोरेंट में भी ऐसा ही था. ये बढ़िया लगा. और हाँ पिछले ब्लॉग में ट्रैन की एक बात छूट गई थी एस्कलेटर पे दाहिने हाथ पर खड़े होना होता है ताकि जिन्हे जल्दी है वो लेफ्ट से चलकर या भागकर निकल जाएँ.  इसका वीडियो यहाँ नहीं पोस्ट कर सकती आगे कभी लिंक शेयर करुँगी.

शहर में हर देश के लोग दिखते हैं.लगता है दुनिया भर के लोग यहाँ घूमने ही आये हैं.  पर ये शहर बड़ा महंगा है, कुछ भी खरीदते वक़्त मैं मन ही मन में रुपये में ही तुलना करती रहती 😃😃. इस अंतर के कारण भी बिटिया के लाख बुलाने पर भी लंदन आने के लिए मन राजी नहीं हो पा रहा था. अब जब आ गई हूं और घूम रही हूं तो लगता है कि अब भी नहीं आ पाती तो कब आती. आज बेटी से कहा कि तुम जरुर घूमती रहा करो, दुनिया देखो, हमारे जैसे जीवन की आपधापी में उलझ कर मत रह जाना. ये सभी युवाओं के लिए सन्देश है कि जब भी जैसा अवसर मिले निकलो. आजकल तो ट्रेवल हॉस्टल जैसे तमाम साधन हैं रुकने के, सोलो ही सही पर अपना bagpack लेकर निकल लो. दुनिया बहुत खूबसूरत है इसे देखो, इस घूमने में जीवन के कई रंगों से परिचय होगा जो आपके व्यक्तित्व को और चमकदार बनाएगा. 

अभी के लिए इतना ही...

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