Sunday, January 14, 2024

London Diary - लंदन ठुमकदा

 लंदन पंहुचने के बाद पहली बार सुबह धूप दिखी थी और हम 'जादू' ( जी हाँ वही कोई मिल गया वाला ) की तरह धूप देखकर खुश हो गए थे.


 (Westminster abbey के बाहर का नजारा 👇🏻



पर जब हम Westminster Abbey में थे तब तक फिर बरखा रानी झूम कर बरसी और एबे से निकलते ही हमें थोड़ा भिगाया और अपने छातों में हम पंहुचे Westminster Palace यानि इंग्लैंड की संसद. संसद में अंदर विजिट के बाद मेरे प्यारे दोस्त ( अगर आपने मेरा इंस्टाग्राम अकाउंट देखा है तो आप जानते हैं कि बादल मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं ) बादलों ने हमारे बाहर निकलने पर हम हिंदुस्तानी जादुओं के सम्मान  मे वापस धूप को भेज दिया 😃😃😃

 तो बरखा की इस आँख मिचौली के बाद जैसे ही बाहर निकले, हमें मिली बड़ी बहन, हाहाहाहा... Big Ben. अब आपको फिर याद दिलाऊं अपने हिंदुस्तानी स्टाइल में तो मेरा आज का टाइटल देखिये... तू घंटी बिग बेन दी पूरा लंदन ठुमकदा ❤️❤️❤️, इस गाने वाली बिग बेन....तो मैं भी थोड़ी सी, हाँ थोड़ी सी ठुमक ली ☺️☺️




एक छोटा सा वीडियो बिग बेन का जैसे उसे मैंने पहली बार देखा.  जिसे अब क्वीन एलिज़ाबेथ की याद में एलिज़ाबेथ टॉवर के नाम से जानते हैं.



Westminster palace जैसा कि नाम ही पैलेस था, उसके अनुरूप आलीशान था. गज़ब की वास्तुकला थी भीतर, लेकिन फोटोग्राफी केवल दरवाजे तक ही कर सकते थे बाकी के लिए आपको खुद जाना होगा.  रही बात इतिहास की तो वो जानना दिलचस्प था कि कैसे राजशाही के साथ संसदीय लोकतंत्र ने जन्म लिया. खूबसूरत सेंट्रल हॉल जिसके एक तरफ House of Lord's और एक तरफ house of Commons था. नाम के अनुरूप दोनों का इंटीरियर भी उच्च सदन आलीशान और कॉमन वाला साधारण... लेकिन सत्ता की बात करें तो असली सत्ता आम आदमी वाले सदन में ही है.


ये है  Westminster palace का पहला ऐतिहासिक हॉल जो 11वीं सदी में बना. उस समय यह इंग्लैंड का सबसे बड़ा हॉल था जो समय समय पर सत्ता के अनुसार अलग अलग उपयोग में आता रहा, आजकल राजपरिवार या देश कोई महत्वपूर्ण के व्यक्ति के निधन के बाद अंतिम सम्मान हेतु यहाँ रखा जाता है.
और इसके बाद ये है इंग्लैंड की संसद का प्रवेश द्वार...





थैंम्स नदी के किनारे स्थित इस पैलेस की खूबसूरती देखते ही बनती है.  1840 से 1876 के बीच पुनरनिर्मित इस भवन का एरिया 112476 वर्ग मीटर है.


Westminster palace ( glasswork )

मेरे लिए ये जानना दिलचस्प था कि इंग्लैंड कैसे 1686 से 1888 के दौरान राजशाही से लोकतंत्र में परिवर्तित हुआ.  लेकिन महिलाओं को अपने वोट देने के अधिकार के लिए 90 साल का लम्बा संघर्ष करना पड़ा और उन्हें 1921 में यह अधिकार मिला.

इनके संसदीय इतिहास को जानने के दौरान यहीं लगता रहा कि ये कौनसी मानसिकता थी कि दूसरे देशों को अपने पराधीन रखो और वहां के संसाधनों को लूट कर खुद को संपन्न करो, ये कैसा लोकतंत्र और क्या इसकी ऐतिहासिकता...

दिन अभी बाकी है....

उम्मीद अभी बाकी है...

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